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भारत में वर्ष दर वर्ष हवाई यात्रियों की संख्या में हुई ये बढ़ोत्तरी

भारत में वर्ष दर वर्ष हवाई यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. लोग रेल यात्रा से ज्यादा फ्लाइट को तरहीज दे रहे हैं, फिर भी पिछले छह वर्षों में राष्ट्र की पांच एयरलाइंस बंद हो चुकी हैं. अब सवाल यह उठ रहा है कि यात्रियों की संख्या बढ़ने के बावजूद आखिर एयरलाइंस के लगातार बंद होने की वजह क्या हैं.

हाल में ही जेट एयरवेज ने अपनी सभी व्यवसायिक उड़ानों को बंद कर दिया है. इससे पहले वर्ष 2012 में माल्या की किंगफिशर भी बंद हो गई थी. घाटे में चल रही एयर इंडिया को कोई खरीदार नहीं मिल रहा है. इसके लिए गवर्नमेंट को हमेशा मियाद को बढ़ाना पड़ रहा है. केवल इंडिगो को छोड़ दिया जाए तो हिंदुस्तान की लगभग सभी एयरलाइंस को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है.

अंतर्राष्ट्रीय विमानन संगठन आईएटीए के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में हिंदुस्तान में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 10 प्रतिशत के दर से बढ़ रही है. इसके अतिरिक्त पिछले 54 महीनों से यात्रियों की संख्या में बढ़ोत्तरी का फीसदी लगातार दहाई में रहा है. डॉयरक्ट्रेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) के अनुसार, वर्ष 2018 में हिंदुस्तान में लगभग 1390 लाख यात्रियों ने यात्रा की.

गवर्नमेंट की महत्वकांक्षी योजना ‘उड़ान’ के प्रारम्भ होने से भी विमान यात्रियों की संख्या में वृद्धि देखी गई है.  2017 में यह आंकड़ा 1172 लाख के आस-पास था. रीजनल कनेक्टिविटी योजना ‘उड़ान’ के प्रारम्भ होने के कारण एयरलाइंस को अपना प्रचालन एरिया बढ़ाने में मदद मिली है.

एयरलाइंंस के बंद होने के पीछे ये हैं कारण

महंगा जेट ईंधन

भारत में जेट ईंधन के दाम अन्य राष्ट्रों की अपेक्षा 10 प्रतिशत ज्यादा है. एटीएफ की मूल्य हर माह की पहली तारीख को पिछले महीने कच्चे ऑयल के अंतर्राष्ट्रीय कीमतों  विदेशी मुद्रा विनिमय दर के औसत के आधार पर संशोधित की जाती है.

हवाई यात्रा पर ज्यादा टैक्स

जीएसटी यानी गुड्स एवं सर्विस कर लागू होने के बाद से एयरलाइंस कंपनियों की परिचालन लागत 27 प्रतिशत बढ़ गई है. GST में हवाई यात्रा पर 5 प्रतिशत के कर स्लैब में रखा गया है.

महंगा एयरपोर्ट चार्ज

दिसंबर 2018 से हिंदुस्तान में यात्रियों को उपभोक्ता डिवेलपमेंट फी की स्थान पर पैसेंजर सर्विस फी (PSF) देना पड़ रहा है. पहले घरेलू उड़ान के लिए 10 रुपये  अंतर्राष्ट्रीय उड़ान के लिए 45 रुपये का शुल्क देना होता था लेकिन अब यह शुल्क 77 रुपये हो गया है. विदेशी मुद्रा से टिकट खरीदने पर यह चार्ज 1.93 डॉलर है. इसके अतिरिक्त एयरलाइन्स को एयरपोर्ट पर सुविधा लेने के लिए शुल्क देना पड़ता है. यह उस एयरपोर्ट के ग्रेड पर निर्भर होता है कि शुल्क कितना होगा. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इसमें भी वृद्धि की है.

कमजोर होती रुपये की ताकत

एयरलाइंस को विदेशों में ऑपरेट करने के लिए संबंधित राष्ट्र को एक निश्चित शुल्क भी देना होता है. इस शुल्क का भुगतान डॉलर में होता है. लेकिन, रुपये की निर्बल होती ताकत एयरलाइंस को घाटे में ला रही हैं.

किंगफिशर

विजय माल्या की किंगफिशर ने लगातार हो रहे घाटे के कारण वर्ष 2012 में अपना कारोबार समेट लिया था. भगोड़ा घोषित हो चुके विजय माल्या पर इंडियन बैंकों के नौ हजार कोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है.

जूम एयर

इस एयरलाइन की स्थापना 2013 में सुरेंद्र कुमार कौशिक द्वारा जेक्सस एयर के रूप में की गई थी. वर्ष 2014 में इंडियन नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इसे अनापत्ति प्रमाण लेटरजारी किया था.  3 फरवरी 2017 को जूम एयर ने अपने एयर ऑपरेटर का प्रमाण लेटर प्राप्त किया. लेकिन, जुलाई 2018 को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने जूम एयर का लाइसेंस सुरक्षा मानकों में कोताही बरतने के कारण निलंबित कर दिया. तब से यह एयरलाइन बंद पड़ी हुई है.

एयर कार्निवल

इस एयरलाइन की स्थापना वर्ष 2013 में की गई थी. जिसका बेस कोयम्बटूर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बनाया गया था. एयर कार्निवाल की पहली उड़ान 2016 में हुई. इस एयरलाइन ने 6 अप्रैल 2017 को संचालन बंद कर दिया. जिसका कारण बढ़ता कर्ज था.

एयर कोस्ट

इस एयरलाइन ने दक्षिण हिंदुस्तान में अक्टूबर 2013 में एक क्षेत्रीय एयरलाइन के रूप में परिचालन प्रारम्भ किया. इसकी पहली उड़ान 16 अक्टूबर 2013 को चेन्नई से हुई. इस एयरलाइन को अक्टूबर 2016 में पूरे हिंदुस्तान में परिचालन के लिए परमिट मिला. लेकिन, घाटे के कारण 28 फरवरी 2017 एयरलाइन ने अपना परिचालन बंद कर दिया.

एयर पेगसास

इस इंडियन क्षेत्रीय एयरलाइन ने 12 अप्रैल 2015 को बंगलूरु  हुबली के बीच पहली उड़ान भरी थी. यह एयरलाइन डेकोर एविएशन की सहायक कंपनी थी. वित्तीय कठिनाइयों के कारण इस एयरलाइन ने 27 जुलाई 2016 को परिचालन बंद कर दिया.
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