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भारतीय रिजर्व बैंक में कार्यरत सभी कर्मचारी नहीं सरकारी सेवक

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) में कार्यरत सभी कर्मचारी सरकारी सेवक नहीं है. मद्रास न्यायालय ने एक निर्णय देते हुए बोला है कि इनको किसी भी हाल में सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता है.जस्टिस के के शशिधरन  जस्टिस पी जी ऑडीकेसवलू की खंडपीठ ने निर्णय सुनाते हुए बोला कि भारतीय रिजर्व बैंक पर चूंकि केंद्र गवर्नमेंट का नियंत्रण है, लेकिन उसके बाद भी इसके कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता है.

न्यायालय ने बोला कि यह सही है कि भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना संविधान के अनुछेद 12 के तहत की गई है. लेकिन तब भी कर्मचारी के लिए यह नहीं माना जा सकता है कि उसको सरकारी आदमी माना जाएगा.

इस केस में दिया फैसला 

हाईकोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मचारी ई विजय कुमार की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्णय दिया. विजय ने याचिका में गुहार लगाई थी कि उसका तमिलनाडु लोकसेवा आयोग ने उसका इम्तिहान परिणाम रोक रखा है. आयोग को लगा कि वो पहले से भारतीय रिजर्व बैंक में कार्य करने के कारण एक सरकारी कर्मचारी है  उसने यह बात अपने आवेदन लेटर में छुपाई है.

विजय कुमार ने आवेदन लेटर में पूछे गए सवाल क्या आप सरकारी कर्मचारी हैं? तो उसने जवाब में न लिख दिया. विजय ने इम्तिहान दी  उसको पुलिस उपाधीक्षक पद के लिए चुन लिया गया. हालांकि आयोग द्वारा छानबीन करने पर उसको गलत जानकारी देने का दोषी पाया गया.

बैंक का कर्मचारी नहीं हो सकता है सरकारी कर्मचारी

हालांकि न्यायालय का तर्क था कि बैंक का कर्मचारी सरकारी सेवा में है, ऐसा नहीं माना जा सकता है. न्यायालय का मानना था कि विजय कुमार ने अपना आवेदन सही तरीके से भरा था. न्यायालय ने लोक सेवा आयोग को एक सप्ताह के भीतर कुमार को पद पर नियुक्त करने का लेटर जारी करने का आदेश दिया है.
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