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गर्भावस्था के दौरान ये करना शिशु के लिए साबित हो सकता है महंगा, एम्स के अध्ययन में हुआ खुलासा

गर्भावस्था के दौरान चूल्हे पर खाना बनाना नवजात शिशु के लिए महंगा साबित हो सकता है. जन्म के बाद नवजात एक ऐसी विकृति का शिकार हो सकता है, जिसमें उसके होंठ कटे हो सकते हैं. राष्ट्र में सालाना ऐसे करीब 35 हजार से ज्यादा शिशु जन्म भी ले रहे हैं. एम्स के दंत चिकित्सा एजुकेशन एवं अनुसंधान (सीडीईआर) के अध्ययन में ये खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था के दौरान चूल्हे से निकलने वाले धुएं में सांस लेना, शराब  बीड़ी-सिगरेट का सेवन, ज्यादा दवाएं लेना या किसी तरह का रेडिएशन नवजात शिशु के चेहरे पर विकृति ला सकता है.

खास बातें

  • एम्स के सीडीईआर के अध्ययन में सामने आई सच्चाई
  • 2010 से चार अस्पतालों के साथ मिलकर चल रहा है अध्ययन
  • तीन में से दो चरण पूरे होने के बाद डॉक्टरों ने जताई चिंता

साल 2010 में प्रारम्भ हुआ ये अध्ययन तीन में से दो चरण पूरे कर चुका है. एम्स, सफदरजंग, मेदांता अस्पताल के चिकित्सक इस अध्ययन को कर रहे हैं. एम्स के विशेषज्ञों ने दावा किया कि फिल्हाल अभी हिंदुस्तान में इससे जुड़े आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन राष्ट्र के अलग-अलग हिस्से में हुए कई अध्ययन यह पुष्टि करते हैं कि होंठ कटे होने के कई मामले सामने आते रहे हैं. अनुमान है कि हिंदुस्तान में हर वर्ष करीब 35 हजार ऐसे नए मामले सामने आते हैं. अनुमान यह भी है कि एशियाई नवजात शिशुओं में प्रति हजार में से 1.7 शिशु कटे होंठ के शिकार होते हैं.

2010 से अब तक चल रहा है अध्ययन

एम्स सीडीईआर के निदेशक डॉ ओपी खरबंदा का कहना है कि 2010 से 2012 के बीच इस अध्ययन का प्री पायलट चरण पूरा किया था. वहीं 2012 से 2014 के बीच 164 कटे होंठ वाले बच्चों पर अध्ययन किया था. ये बच्चे एम्स, सफदरजंग  मेदांता अस्पताल में इलाज करा रहे थे. डॉ खरबंदा ने बताया कि अभी इस अध्ययन का अंतिम चरण चल रहा है, जिसके लिए दिल्ली के अतिरिक्त हैदराबाद, गुवाहाटी  लखनऊ के चिकित्सक योगदान कर रहे हैं. डॉ खरबंदा का कहना है कि  इस विकृति से जूझ रहे मरीजों को उपचार की तत्काल आवश्यकता होती है  इसके लिए गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान की व्यवस्था में सुधार की रणनीति बनाने की आवश्यकता है.

बच्चों को आती है बहुत ज्यादा दिक्कतें 

डॉ खरबंदा ने बताया कि अध्ययन में पता चला है कि शराब, धूम्रपान, चूल्हे पर कार्य करना, ज्यादा दवाएं लेना या किसी रेडिएशन के संपर्क में आने के कारण होंठ कटे हो सकते हैं या तालू में कोई विकृति हो सकती है. कटे हुए होठों से बच्चे को बोलने  खाना चबाने में दिक्कत आती है. इससे दांत भी बेतरतीब हो जाते हैं, जबड़े से उनका तालमेल बिठाने में दिक्कत पेश आती है  चेहरे की आकृति बिगड़ी नजर आती है.

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