Thursday , December 13 2018
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मृत अंगदाता से प्राप्त गर्भाशय प्रतिरोपण महिला ने बच्ची को दिया जन्म

 दुनिया में पहली बार एक मृत अंगदाता से प्राप्त गर्भाशय के प्रतिरोपण के बाद ब्राजील की एक महिला ने बच्ची को जन्म दिया है ‘लांसेट’ पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक अंगदाता से गर्भाशय का प्रतिरोपण मुमकिन है  गर्भाशय की समस्या की वजह से बच्चे को जन्म देने में अक्षम स्त्रियों के लिये यह नई उम्मीद की तरह हैवर्तमान में स्त्रियों के लिए गर्भाशय अंगदान केवल परिवार में ही हो सकता है

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ब्राजील के साओ पाउलो विश्वविद्यालय के डानी एजेनबर्ग ने शोध का नेतृत्व किया उन्होंने बताया, ‘‘मृत अंगदाता के अंग के प्रयोग से इसमें बड़ी मदद मिल सकती है  हमारे नतीजे गर्भाशय की दिक्कत से जूझ रही स्त्रियों के लिए नया विकल्प मुहैया कराता है ’’

जिस महिला में गर्भाशय का प्रतिरोपण किया गया, वह गर्भाशय संबंधी दिक्कतों का सामना कर रही थी लातिन अमेरिका में गर्भाशय का यह पहला प्रतिरोपण है

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इससे पहले अमेरिका, चेक रिपब्लिक  तुर्की में मृत महिला के गर्भाशय प्रतिरोपण के 10 कोशिश किए गए, लेकिन जीवित बच्चे के जन्म का यह पहला मामला है सितंबर 2013 में स्वीडन में पहली बार जीवित महिला का गर्भाशय प्रतिरोपित किया गया था कुल मिलाकर इस तरह 39 बार ऑपरेशन किया गया, जिससे अब तक 11 बार जन्म हुआ

एजेनबर्ग ने बताया कि जिंदा अंगदाता से पहली बार गर्भाशय का प्रतिरोपण मील का पत्थर था इसके कारण बच्चे को जन्म देने में अक्षम कई स्त्रियों के लिए बच्चे को जन्म देने की आसार बढ़ गई

उन्होंने बोला कि जीवित महिला से गर्भाशय मिलना बहुत ज्यादा कठिन होता है ऐसे में चिकित्सक ऐसी प्रक्रिया की तलाश में थे, जिससे मृत महिला का गर्भाशय प्रयोग किया जा सके एजेनबर्ग के मुताबिक, मरने के बाद कई लोग अपना अंग दान करना चाहते हैं इनकी संख्या जीवित रहते हुए अंग दान करने वालों से कहीं ज्यादा होती है

यह सर्जरी 2016 में हुई थी 32 वर्ष की जिस महिला में गर्भाशय प्रतिरोपित किया गया वह गंभीर बीमारी से पीड़ित थी गर्भाशय देने वाली 45 वर्षीय महिला की मौत हो गई थी साढ़े दस घंटे के अंदर मृत महिला से गर्भाशय को निकालकर उसे दूसरी महिला में प्रतिरोपित कर दिया गया

पांच महीने बाद गर्भाशय को बॉडी द्वारा स्वीकार नहीं करने के कोई इशारा नहीं मिले  महिला का मासिक चक्र नियमित पाया गया प्रतिरोपण के सात महीने बाद महिला में निषेचित अंडे इम्प्लांट किए गए

दस दिनों बाद डॉक्टरों ने उसके गर्भधारण की सूचना दी 32 सप्ताह तक गर्भावस्था सामान्य थी इस तरह 35 सप्ताह  तीन दिन में महिला ने 2.5 किलो की बच्ची को सीजेरियन तरीके से जन्म दिया

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