Thursday , December 13 2018
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भाजपा के एडवोकेट व महाधिवक्ता किशोर दत्त ने एक दूसरे के दावों का किया खंडन

बीजेपी (बीजेपी)ने यह दावा करते हुए बुधवार को कलकत्ता उच्च कोर्ट का रुख किया कि पश्चिम बंगाल प्रशासन ने राज्य में सात दिसम्बर से तीन रैलियां निकालने की इजाजत मांगने वाले उसके आवेदनों पर अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह सात दिसंबर को राज्य में तीन ‘रथ यात्राओं’ पर आधारित पार्टी की ‘लोकतंत्र बचाओ रैली’ की आरंभ करने वाले हैं

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यह मामला न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती की पीठ के समक्ष पेश हुआ जहां भाजपा के एडवोकेट  महाधिवक्ता किशोर दत्त ने एक दूसरे के दावों का खंडन किया इसके बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों को एक साथ बैठ कर मुद्दे का निपटारा करने  फिर न्यायालय आने को कहा

बाद में, एजी ने बोला कि तीन रैलियों में जबरदस्त सुरक्षा प्रबंध की आवश्यकता होगी  इसके लिए उन्हें राज्य गवर्नमेंट से आदेश लेने होंगे उन्होंने इसके लिए बृहस्पतिवार तक का समय मांगा न्यायालय ने इसके लिए समय दे दिया

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यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा ने राज्य में इस तरह की शिकायत को ले कर न्यायालय का रुख किया है भाजप ने न्यायालय में दावा किया कि उसने तीन रैलियों के लिए इजाजत मांगी थी, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला

बीजेपी की योजना सात दिसंबर को उत्तर में कूचबिहार से, नौ दिसंबर को दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप से,  14 दिसंबर को बीरभूक के तारापीठ मंदिर से रैली निकालने की है

महाधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि पुलिस महानिदेशक  पुलिस महानिरीक्षक या गृह सचिव रैलियों के लिए इजाजत देने वाले सक्षम प्राधिकार नहीं हैं  एक राजनीतिक पार्टी होने के नाते याचिकाकर्ता (बीजेपी) को यह बात जाननी चाहिए उन्होंने बोला कि याचिकाकर्ता को यह पता होना चाहिए कि उसे इसके लिए किसे आवेदन भेजना है

इस पर भाजपा के एडवोकेट ने बोला कि उन्होंने उन जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी आवेदन किय है जहां से तीन ‘रथ यात्राएं’ गुजरेंगी

बीजेपी की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अनिंदय मित्रा ने बोला था कि 29 अक्टूबर को डीजी-आईजीपी को आवेदन किया गया था  फिर 14 नवंबर को गृह सचिव को आवेदनपत्र भेजे गए उन्होंने बोला कि बाद की तारीखों में इन अधिकारियों को स्मरणपत्र भेजे गए, लेकिन भाजपा को कोई जवाब नहीं मिला मित्रा ने न्यायालय को बताया कि गवर्नर केएन त्रिपाठी ने भी आवेदन पत्रों पर विचार करने के लिए राज्य गवर्नमेंट को लेटर लिखे

इस पर महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने बोला कि गवर्नर एक संवैधानिक प्राधिकार हैं  इस तरह के उच्च पद पर आसीन किसी आदमी को किसी राजनीतिक दल के आवेदन के बारे में इस तरह का आग्रह करना उचित नहीं है

न्यायमूर्ति चक्रवर्ती ने बोला कि पुलिस महानिदेशक  पुलिस महानिरीक्षक जिम्मेदार ऑफिसर हैं  उन्हें आवेदनकर्ताओं को बताना चाहिए था कि वे सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं

महाधिवक्ता ने बोला कि तीन यात्राएं 41 दिन में पूरी होनी हैं  यह राज्य के सभी जिलों से हो कर गुजरेंगी इसके सुरक्षा पहलुओं का निर्णय एक दिन के अंदर नहीं किया जा सकता

 

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